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इक्कीसवीं पहेली – मन्वंतर का सिद्धान्त

ब्राह्मणों का एक सिद्धान्त था कि उनके देश का शासन स्वर्ग से चलता है। मन्वंतर का यही अर्थ प्रतीत होता है। मन्वंतर का आशय देश की राजनीतिक सत्ता से है। इसके पीछे यह विश्वास है… इक्कीसवीं पहेली – मन्वंतर का सिद्धान्त

बीसवीं पहेली – कलि वर्ज्य अथवा पाप को पापकर्म घोषित किए बिना स्थगन की ब्राह्मणवादी कला

ब्राह्मणों की कलिवर्ज्य नामक हठधर्मी बहुत कम लोगों को ज्ञात है। कलियुग को अन्य ब्राह्मणवादी हठधर्म से इसको भ्रमित नहीं करना चाहिए। कलिवर्ज्य की हठधर्मी में कुछ प्रथाओं और व्यवहारों को गिनाया गया है जो… बीसवीं पहेली – कलि वर्ज्य अथवा पाप को पापकर्म घोषित किए बिना स्थगन की ब्राह्मणवादी कला

उन्नीसवीं पहेली – पितृत्व से भातृत्व की ओरः ब्राह्मणों को इससे क्या मिला

हिंदू विधान पर अपने शोध प्रबंध में मयने ने संकेत दिया है कि सगोत्रता विधानमें कुछ विसंगतियां हैं। उनका कथन हैः हिंदू विधान में इतनी विसंगतियां और कहीं नहीं हैं, जितनी पारिवारिक संबंधों के प्रसंग… उन्नीसवीं पहेली – पितृत्व से भातृत्व की ओरः ब्राह्मणों को इससे क्या मिला

अठारहवीं पहेली – मनु का पागलपन या मिश्रित जातियों की उत्पत्ति की ब्राह्मणवादी व्यवस्था

किसी विचारगोष्ठी के लिए यदि कोई मनुस्मृति का अध्ययन करेगा तो वह पाएगा कि उसने जातियों की कई श्रेणियां की हैं। उनके नाम हैं: 1- आर्य जातियां, 2- अनार्य जातियां, 3- व्रात्य जातियां, 4- पतित… अठारहवीं पहेली – मनु का पागलपन या मिश्रित जातियों की उत्पत्ति की ब्राह्मणवादी व्यवस्था

सत्रहवीं पहेली – चार आश्रम – उनका कारण और परिणति

समाज को चार वर्णों में विभाजित कर डालना ही हिंदू समाज की एक मात्र विशिष्टता नहीं है। आश्रम धर्म भी एक अन्य है फिर भी इन दोनों में एक अंतर है। वर्ण धर्म समाज के… सत्रहवीं पहेली – चार आश्रम – उनका कारण और परिणति

सोलहवीं पहेली – चातुर्वर्ण्ये -क्या ब्राह्मण उनकी उत्पत्ति से परिचित हैं

प्रत्येक हिंदू का यह मूल विश्वास है कि हिंदुओं की सामाजिक व्यवस्था दैवीय है। इस दैवीय व्यवस्था के तीन आधार हैं। प्रथम, समाज चार वर्णों में विभक्त है- 1. ब्राह्मण, 2. क्षत्रिय, 3. वैश्य और… सोलहवीं पहेली – चातुर्वर्ण्ये -क्या ब्राह्मण उनकी उत्पत्ति से परिचित हैं

हर खंड में अन्दर क्या है देखने के बाद जो किताब आपको चाहिये सिर्फ उसे ही डाउनलोड करना

खंड संख्या  विषय सूची  डाउनलोड करें  1 भाग-I जातिप्रथा 1. भारत में जातिप्रथा        1 2. जातिप्रथा-उन्मूलन        25 भाग-II भाषायी राज्यों के संबंधा में 3. महाराष्ट्र:  एक भाषावार प्रांत      113 4. निरीक्षण तथा संतुलन के उपायों… हर खंड में अन्दर क्या है देखने के बाद जो किताब आपको चाहिये सिर्फ उसे ही डाउनलोड करना

आंदोलन – सामाजिक परिवर्तन का मार्ग – बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के विचार

परिचय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, एक प्रमुख भारतीय न्यायविद, अर्थशास्त्री और समाज सुधारक, ने आधुनिक भारत के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वंचित समुदायों, विशेष रूप से दलितों के अधिकारों… आंदोलन – सामाजिक परिवर्तन का मार्ग – बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के विचार

प्राचीन भारत में क्रांति तथा प्रतिक्रांति

जय भीम दोस्तों, बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर द्वारा रचित “प्राचीन भारत में क्रांति तथा प्रतिक्रांति” किताब के विभिन अध्यायों को खोलने के लिए उस पर क्लिक करें – 1. प्राचीन भारत के इतिहास पर प्रकाश  2.… प्राचीन भारत में क्रांति तथा प्रतिक्रांति

बाबासाहेब आंबेडकर के सभी 40 खंडों को एक-एक करके अलग से डाउनलोड करके देखना

बाबासाहेब आंबेडकर के सभी 40 खंडों को एक-एक करके अलग से डाउनलोड करके देखना – खंड संख्या  डाउनलोड करें  खंड संख्या 1 डाउनलोड करें खंड संख्या 2 डाउनलोड करें खंड संख्या 3 डाउनलोड करें खंड… बाबासाहेब आंबेडकर के सभी 40 खंडों को एक-एक करके अलग से डाउनलोड करके देखना