कोई भी सुधाार तब शुरू होता है, जब कोई व्यक्ति अपने समुदाय के मानकों, समुदाय की सत्ता और समुदाय के हित से ऊपर और उससे अलग अपने विचारों, अपनी धाारणाओं और स्वयं की स्वतं=ता और…
अनुक्रमणिका I – भूमिका – जाति का विनाश II – प्रस्तावना – जाति का विनाश अध्याय – 1 – बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर का जात पात तोड़क मंडल का अध्यक्ष बनना अध्याय – 2 – सामाजिक…
हिन्दू समुदाय जिन कारणों से शुि) करने में असमर्थ है, उन्हीं कारणों से उनका संगठन भी असंभव है। संगठन का मूल आधाार यह है कि हिन्दुओं के मन से उस कायरता और बुजदिली को हटा…
हिन्दू धार्म प्रचारमूलक धार्म था या नहीं, यह विवादास्पद है। कुछ लोगों का विचार है कि यह प्रचारमूलक धार्म कभी नहीं रहा। दूसरों की यह मान्यता है कि यह प्रचारमूलक था तथापि यह स्वीकार करना…
हिन्दुओं ने न केवल वन्य जातियों को सभ्य बनाने का मानवतावादी कार्य करने का कोई प्रयास नहीं किया, बल्कि ऊंची जाति वाले हिन्दुओं ने जान-बूझकर हिन्दू समाज की निचली जातियों को ऊंची जाति के सांस्कृतिक…
देश के विभिन्न असम्मिलित क्षेत्रें और अंशतः सम्मिलित क्षेत्रें के बारे में आजकल जो चर्चा चल रही है, उससे भारत में मूल जन-जातियों की स्थिति पर लोगों का धयान गया है। इन जातियों के लोगों…
हिन्दू लोग प्रायः यह शिकायत करते हैं समाज में अलग से असामाजिक तत्त्वों का कोई दल है जो असामाजिक बुराईयों या भावना का कारण है, लेकिन वे अपनी सुविधाा के लिए यह भूल जाते हैं…
जातिप्रथा से आर्थिक उन्नति नहीं होती। जातिप्रथा से न तो नस्ल या प्रजाति में सुधार हुआ है और न ही होगा। लेकिन इससे एक बात अवश्य सि) हुई है कि इससे हिन्दू समाज पूरी तरह…
कुछ लोगों ने जातिप्रथा के समर्थन में जैविक दलील दी है। कहा जाता है कि जाति का उद्देश्य प्रजाति की शु)ता और रक्त की शु)ता को परिरक्षित रखना है। अब नृजाति वैज्ञानिकों का मत है…
खेद है कि आज भी जातिप्रथा के समर्थक मौजूद हैं। इसके समर्थक अनेक हैं। इसका समर्थन इस आधाार पर किया जाता है कि जातिप्रथा श्रम के विभाजन का एक अन्य नाम ही है। यदि श्रम…