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अध्याय – 12 – समाज से बहिष्कृत करने का मतलब है समाज सुधार को रोकना

कोई भी सुधाार तब शुरू होता है, जब कोई व्यक्ति अपने समुदाय के मानकों, समुदाय की सत्ता और समुदाय के हित से ऊपर और उससे अलग अपने विचारों, अपनी धाारणाओं और स्वयं की स्वतं=ता और… अध्याय – 12 – समाज से बहिष्कृत करने का मतलब है समाज सुधार को रोकना

जाति का विनाश

अनुक्रमणिका I – भूमिका – जाति का विनाश II – प्रस्तावना – जाति का विनाश अध्याय – 1 –  बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर का जात पात तोड़क मंडल का अध्यक्ष बनना अध्याय – 2 – सामाजिक… जाति का विनाश

अध्याय – 11 – हिंदू धर्म की विभिन्न जातियों के बीच भाईचारा क्यों नहीं है ?

हिन्दू समुदाय जिन कारणों से शुि) करने में असमर्थ है, उन्हीं कारणों से उनका संगठन भी असंभव है। संगठन का मूल आधाार यह है कि हिन्दुओं के मन से उस कायरता और बुजदिली को हटा… अध्याय – 11 – हिंदू धर्म की विभिन्न जातियों के बीच भाईचारा क्यों नहीं है ?

अध्याय – 10 – हिंदू धर्म एक मिशनरी धर्म क्यों नहीं है ?

हिन्दू धार्म प्रचारमूलक धार्म था या नहीं, यह विवादास्पद है। कुछ लोगों का विचार है कि यह प्रचारमूलक धार्म कभी नहीं रहा। दूसरों की यह मान्यता है कि यह प्रचारमूलक था तथापि यह स्वीकार करना… अध्याय – 10 – हिंदू धर्म एक मिशनरी धर्म क्यों नहीं है ?

अध्याय – 9 – ब्राह्मणों ने निम्न जातियों को उनका सामाजिक स्तर सुधारने से क्यों रोका ?

हिन्दुओं ने न केवल वन्य जातियों को सभ्य बनाने का मानवतावादी कार्य करने का कोई प्रयास नहीं किया, बल्कि ऊंची जाति वाले हिन्दुओं ने जान-बूझकर हिन्दू समाज की निचली जातियों को ऊंची जाति के सांस्कृतिक… अध्याय – 9 – ब्राह्मणों ने निम्न जातियों को उनका सामाजिक स्तर सुधारने से क्यों रोका ?

अध्याय – 8 – आदिवासियों की सुध क्यों नहीं ली हिंदुओं ने ?

देश के विभिन्न असम्मिलित क्षेत्रें और अंशतः सम्मिलित क्षेत्रें के बारे में आजकल जो चर्चा चल रही है, उससे भारत में मूल जन-जातियों की स्थिति पर लोगों का धयान गया है। इन जातियों के लोगों… अध्याय – 8 – आदिवासियों की सुध क्यों नहीं ली हिंदुओं ने ?

अध्याय – 7 – हिंदू जातियों में एक दूसरे के प्रति दुर्भावना क्यों हैं ?

हिन्दू लोग प्रायः यह शिकायत करते हैं समाज में अलग से असामाजिक तत्त्वों का कोई दल है जो असामाजिक बुराईयों या भावना का कारण है, लेकिन वे अपनी सुविधाा के लिए यह भूल जाते हैं… अध्याय – 7 – हिंदू जातियों में एक दूसरे के प्रति दुर्भावना क्यों हैं ?

अध्याय – 6 – क्या हिंदू मिलकर एक समाज बनाते हैं ?

जातिप्रथा से आर्थिक उन्नति नहीं होती। जातिप्रथा से न तो नस्ल या प्रजाति में सुधार हुआ है और न ही होगा। लेकिन इससे एक बात अवश्य सि) हुई है कि इससे हिन्दू समाज पूरी तरह… अध्याय – 6 – क्या हिंदू मिलकर एक समाज बनाते हैं ?

अध्याय – 5 – क्या जाति प्रथा रक्त की शुद्धता को बचाती है ?

कुछ लोगों ने जातिप्रथा के समर्थन में जैविक दलील दी है। कहा जाता है कि जाति का उद्देश्य प्रजाति की शु)ता और रक्त की शु)ता को परिरक्षित रखना है। अब नृजाति वैज्ञानिकों का मत है… अध्याय – 5 – क्या जाति प्रथा रक्त की शुद्धता को बचाती है ?

अध्याय – 4 – जाति प्रथा – श्रम का विभाजन अथवा मानवों का विभाजन ?

खेद है कि आज भी जातिप्रथा के समर्थक मौजूद हैं। इसके समर्थक अनेक हैं। इसका समर्थन इस आधाार पर किया जाता है कि जातिप्रथा श्रम के विभाजन का एक अन्य नाम ही है। यदि श्रम… अध्याय – 4 – जाति प्रथा – श्रम का विभाजन अथवा मानवों का विभाजन ?