रानाडे का जन्मदिन मनाते समय हमें आलोचकों तथा विरोधियों की संभावित प्रतिक्रिया की उपेक्षा नहीं करनी होगी। आलोचक पूछेंगे कि रानाडे का जन्मदिन मनाने की क्या तुक है? उनका तर्क होगा कि नायक-पूजा के दिन…
रानाडे की तुलना अन्य लोगों से कैसे की जाए? तुलनाएं सदैव अप्रिय होती हैं। साथ ही, यह भी सच है कि तुलना से ही व्यक्ति प्रसिद्ध होता है। वास्तव में, तुलना करते समय यह बात…
एक सुधारक के रूप में उनका मार्ग सरल व निष्कंटक नहीं था। वह अनेक दिशाओं से अवरुद्ध था। जिन लोगों को वह सुधारना चाहते थे, उनकी भावनाएं प्राचीन अतीत में गहरी धंसी हुई थीं। उनका…
क्या रानाडे एक महापुरुष थे? उनका व्यक्तित्व निःसंदेह महान था। वह भीमकाय व्यक्ति थे। यह आशावादी स्वभाव, मिलनसार तथा हंसमुख मनोवृत्ति एवं बहुमुखी क्षमता वाले व्यक्ति थे। उनमें सच्चाई थी, जो सब नैतिक गुणों का…
महापुरुष किसे कहा जा सकता है? यदि पूछा जाए कि क्या सिकंदर, अत्तिला सीजर तथा तैमूरलंग जैसे शूरवीर योद्धा हैं, तो प्रश्न का उत्तर देना कठिन नहीं है। वीर योद्धा युग निर्माता होते हैं और…
पूना की डेक्कन सभा ने मुझे स्वर्गीय न्यायमूर्ति महादेव गोविन्द रानाडे के 101वें जन्मदिन पर एक भाषण देने के लिए आमंत्रित किया जिसे उन्होंने मनाने का प्रस्ताव दिया और जो 18 जनवरी 1940 को पड़ा।…
जय भीम दोस्तों, बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर की पुस्तके एवं लेखन को खोलने के लिए उस पर क्लिक करें – प्रस्तावना अध्याय – 1 अध्याय – 2 अध्याय – 3 अध्याय – 4 अध्याय – 5…
यह जिल्दबद्ध लेख टाईप किए हुए 87 पृष्ठ का है। अम्बट्ठ सुत्त पाण्डुलिपि के पृष्ठ संख्या 69 से आरम्भ होता है और पृष्ठ 70 के पश्चात के पृष्ठों को ‘ए’ से ‘जैड’ तक संख्याबद्ध किया…
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर सोर्स मैटिरियल पब्लिकेशन कमेटी को इस लेख की एक ऐसी प्रति उपलब्ध हुई, जिस पर शीर्षक ‘दि वूमेन एंड दि काउंटर-रिवोल्यूशन’ (नारी और प्रतिक्रांति) दिया हुआ है। इस लेख की दूसरी प्रति…
इसकी पांडुलिपि में टाइप किए हुए तेंतालीस फुलस्केप पृष्ठ हैं। इसके मूल शीर्षक ‘ब्राह्मिन्स एंड क्षत्रियाज एंड दि काउंटर-रिवोल्यूशन’ (ब्राह्मण व क्षत्रिय तथा प्रतिक्रांति) के कवर पर डॉ. अम्बेडकर द्वारा संशोधित शीर्षक ‘ब्राह्मिन्स वर्सेज क्षत्रियाज’…